कविता-संग्रह – कब चुप होती है चिड़िया
कवयित्री – डॉ. शील कौशिक
प्रकाशक – सुकीर्ति प्रकाशन
पृष्ठ – 88
कीमत – 200 /- ( सजिल्द )
बेटी चिड़िया सी होती है | सयानी होती लड़कियां गिलहरियों
जैसी | लडकियों को चिड़िया-गिलहरी के रूप में देखता कविता-संग्रह है “ कब चुप होती
है चिड़िया ” | डॉ. शील कौशिक के इस संग्रह में 49 कविताएँ हैं | कवयित्री लड़की से
सपने के टूटने पर संदेश देती है –
एक घोंसला / तोड़ दिए जाने पर /
दूसरा घोंसला / बुनती है चिड़िया ( पृ. – 78 )






