कहानीकार – डॉ. शील कौशिक
प्रकाशक – अमृत बुक्स, कैथल
पृष्ठ – 88
कीमत – 250/- ( सजिल्द )
बाल साहित्य लिखते समय लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती
है कि वह अपने स्तर को बच्चों के स्तर तक लेकर जाए, तभी वह बच्चों के प्रिय विषयों
को चुन सकता है और विषयों को उस तरीके से निभा पाता है कि बच्चे उसे सहजता से
आत्मसात कर सकें | डॉ. शील कौशिक के बाल कहानी-संग्रह “ बचपन के आईने से ” को पढ़ते
हुए कहा जा सकता है कि लेखिका इस चुनौती की कसौटी पर खरी उतरी है | इस बाल
कहानी-संग्रह में 18 कहानियां हैं | पुस्तक का शीर्षक किसी कहानी पर आधारित नहीं
अपितु यह उनकी समग्रता पर आधारित है | लेखिका ने जीवन को बचपन के आईने से देखने का
सफल प्रयास किया है |
