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बुधवार, मई 27, 2020

प्रकृति के सान्निध्य में सरल जीवन जीने का सन्देश देती कविताएँ

कविता-संग्रह - युग से युग तक
कवि - राजकुमार निजात
प्रकाशन - बोधि प्रकाशन, जयपुर
पृष्ठ - 124
कीमत - ₹150/-
राजकुमार निजात कृत कविता-संग्रह "युग से युग तक" बोधि प्रकाशन से सितंबर 2018 में प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में 101 कविताएँ हैं, जिन्हें कवि ने छह दिनों की अल्पावधि में सृजित किया है। कवि ने प्रकृति और जीवन से जुड़े सजीव-निर्जीव अवयवों जैसे - नदी, पहाड़, सूरज, आसमान, कुआँ, वृक्ष, परिंद, बच्चा, शिक्षक, दादी, स्कूल, घण्टी, रास्ता आदि के माध्यम से अपनी कविताएँ कही हैं। वह परिंदों से, सूरज से, आसमान से बातचीत करता है।

मंगलवार, जनवरी 08, 2019

बालमन के विविध पहलुओं को उद्घाटित करता लघुकथा-संग्रह


लघुकथा-संग्रह - हरियाणा की बल लघुकथाएँ 
संपादक - डॉ. राजकुमार निजात 
प्रकाशक - एस.एन.पब्लिकेशन
पृष्ठ - 176  
कीमत - 550 / - ( सजिल्द )
बच्चों को ईश्वर का रूप कहा जाता है, क्योंकि वे बड़े भोले और साफ़-दिल होते हैं | बालमन को समझने के लिए बड़ी पारखी नजर की जरूरत होती है | “ हरियाणा की बाल-लघुकथा ” एक ऐसा लघुकथा-संग्रह है, जिसमें एक-दो नहीं, अपितु ऐसे बाईस पारखी लघुकथाकार शामिल हैं, जिन्होंने बालमन का बड़ी बारीकी से विश्लेषण किया है और बड़ी सटीकता से इसको ब्यान किया है | इन लघुकथाकारों का संबंध भले ही हरियाणा से है, लेकिन इनकी ख्याति वहां तक फैली हुई है, जहाँ तक लघुकथा की ख्याति है | इन लब्धप्रतिष्ठ लघुकथाकारों को एक विषय पर एक साथ लाने का महत्ती कार्य किया है राजकुमार निजात जी ने | 

रविवार, नवंबर 11, 2018

दिव्यांगों के जीवट को दिखाती हुई लघुकथाएँ

पुस्तक - हौसले की लघुकथाएँ
संपादक – राजकुमार निजात 
प्रकाशन – धर्मदीप प्रकाशन 
पृष्ठ - 144
कीमत – 450 /- ( सजिल्द ) 
साहित्य का उद्देश्य है, कि वह दबे-कुचलों की आवाज बने | सामान्यत: दिव्यांग-जन समाज की उपेक्षा का शिकार होते आए हैं | ऐसे में साहित्यकार का कर्त्तव्य है, कि वह उनको साहित्य का विषय बनाकर उनकी स्थिति में सुधार लाने का प्रयास करे | ऐसा ही प्रयास किया है, डॉ. राजकुमार निजात ने संपादित कृति “हौसलों की लघुकथाएं” द्वारा | यह कृति तीन भागों में विभक्त है | पहले भाग में आलेख हैं, दूसरे भाग में लघुकथाएँ हैं और तीसरे भाग में लघुकथाकारों का परिचय दिया गया है |

बुधवार, मई 23, 2018

समाज में दिव्यांगों की दशा और दिशा का चित्रण करता लघुकथा-संग्रह

लघुकथा-संग्रह – दिव्यांग जगत की 101 लघुकथाएँ 
लेखक – राजकुमार निजात 
प्रकाशक – एस.एन.पब्लिकेशन 
पृष्ठ – 136 
कीमत – 400 /- ( सजिल्द )
अनेकता जहां भारतीय समाज की विशेषता है वहीं भेदभाव का होना इसके माथे पर कलंक जैसा है | भारतीय समाज में जाति, आर्थिकता के आधार पर ऊँच-नीच तो है ही, शारीरिक व मानसिक सक्षमता के आधार पर भी वर्ग हैं | निशक्तजन दिव्यांग कहलाते हैं | कई बार समाज दिव्यांगों के प्रति सामान्यजन जैसा व्यवहार नहीं करता | कहीं इनके प्रति घृणा है, तो कहीं सहानुभूति जबकि बहुधा दिव्यांग इन दोनों को नहीं चाहता | वो चाहता है कि उसे सामान्य पुरुष-स्त्री जैसा सम्मान दिया जाए | राजकुमार निजात जी ने समाज के दिव्यांगों के प्रति नजरिए का बड़ी बारीकी से विश्लेषण करते हुए ‘ दिव्यांग जगत की 101 लघुकथाएँ ’ नामक लघुकथा-संग्रह का सृजन किया है | इस संग्रह में समाज में दिव्यांगों की स्थिति का वर्णन तो है ही, दिव्यांगों के नजरिए से समाज को भी देखा गया है | दिव्यांगों की मनोस्थिति को भी समझा गया है | कुछ दिव्यांग अपनी दिव्यांगता के कारण हीनभावना के शिकार हो जाते हैं, जबकि कुछ अपने हौसले से दिव्यांगता पर विजय पा लेते हैं | लेखक ने इन सभी स्थितियों को लघुकथाओं की कथावस्तु में पिरोया है |

बुधवार, मार्च 21, 2018

विसंगतियों पर चिन्तन करती कृति

कविता-संग्रह - नदी को तलाश है 
कवि - डॉ. राजकुमार निजात 
प्रकाशक - एस.एन.पब्लिकेशन 
पृष्ठ - 128 
कीमत - 300 / - ( सजिल्द )
जीवन की विसंगतियों और प्रकृति के बदलते रूप पर चिन्तन करती हुई 42 मध्यम आकार की और 140 लघु आकार की कविताओं का संग्रह है ' नदी की तलाश है '| कवि को नदी का निरंतर बहना किसी तलाश पर निकलना लगता है |

बुधवार, जनवरी 03, 2018

जीवन दर्शन को ब्यान करने का सफल प्रयास

सूक्ति-संग्रह - सूक्तियाँ मेरा अनुभव संसार 
लेखक - निजात 
प्रकाशक - एस. एन. पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
पृष्ठ - 168 
कीमत - 450 ( सजिल्द )
एक साहित्यकार अपने अनुभव के बल पर अपने साहित्य में अनेक ऐसी पंक्तियाँ लिखता है, जो अपने आप में पूरी रचना होती हैं और जीवन-दर्शन का निचोड़ होने के कारण वे मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं, लेकिन ऐसी उक्तियों को साहित्य में ढूँढने के लिए पाठक के पास भी उच्चकोटि की समझ होनी चाहिए | ' निजात ' जी ने " सूक्तियाँ मेरा अनुभव संसार " में सीधे-सीधे सूक्तियाँ लिखकर पाठक का काम आसान कर दिया है | इस संग्रह में 2200 सूक्तियाँ हैं जो 27 विषयों में विभक्त हैं | निस्संदेह, यह लेखक के विशाल अनुभव का परिणाम है | उसने जीवन को जैसा देखा, जैसा समझा उसे सार रूप में कहा है ताकि आम पाठक उसे समझ सके, अपना सके |

बुधवार, दिसंबर 07, 2016

आम जन की सोच बदलने का कार्य करता चालीसा

काव्य कृति - दिव्यांग चालीसा
कवि - डॉ. राजकुमार निजात
कीमत - निःशुल्क 
जिनके लिए पहले विकलांग या अपाहिज शब्द का प्रयोग किया जाता था, उनके लिए अब दिव्यांग शब्द को अपनाया गया है । अपने आप में शब्द का कोई महत्त्व नहीं होता । दरअसल समस्या शब्द के अर्थ से नहीं, सोच से होती है । दुर्भाग्यवश हम भारतीय लोग बाहरी रंग-रूप को ज्यादा ही महत्त्व देते हैं । गोरे रंग का मोह भी इसी का एक रूप है । यदि यह कहा जाए कि ज्यादातर लोगों की सोच दिव्यांग या विकलांग है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ।

रविवार, अक्टूबर 16, 2016

" बेटी बचाओ, बेटी पढाओ " अभियान हेतु श्लाघनीय प्रयास

कृति - बेटी चालीस
कवि - राजकुमार निजात 
पुरुष और स्त्री जब जीवन रूपी गाड़ी के समान पहिए हैं तो बेटे-बेटी को भी समान महत्त्व दिया जाना चाहिए, लेकिन न तो स्त्री को समानता का दर्जा मिला और न ही बेटी को | कन्या भ्रूण हत्या के अपराध ने लिंगानुपात को भी प्रभावित किया है और यह बालिकाओं के प्रति समाज का घोर अन्याय भी है |

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