उपन्यास - कोई फायदा नहीं
उपन्यासकार - श्याम सखा श्याम
पृष्ठ - 120
(त्रैमासिक पत्रिका मसि-कागद के अंक के रूप में प्राप्त)
हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत उपन्यास 'कोई फायदा नहीं' हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. श्याम सखा श्याम द्वारा लिखा गया है। इस उपन्यास को उन्होंने 'स्त्री-पुरुष संबंधों की विडम्बना पर आधारित' कहा है। ये कहानी है कुलश्रेष्ठ दम्पति की, जिनका दाम्पत्य जीवन बड़ा दुखदायी रहा। रत्ना का यह कहना -
"क्या, विवाह मजबूरी ही रहेगी हमेशा?
" (पृ. - 84)
इसके कथानक को स्पष्ट करती है। वैवाहिक जीवन क्यों दुखदायी बना, इसको विस्तार से बताया गया है। यह घट चुकी घटनाओं का बयान है, इसलिए क्यों का उत्तर मिल पाता है। घट चुकी घटनाएं डायरी के द्वारा प्रकट होती हैं। एक डायरी नरोत्तम कुलश्रेष्ठ की है और दूसरी डायरी उसकी पत्नी रत्ना की। ये दोनों डायरियाँ मिलती हैं शेखर गोस्वामी को। शेखर कर्णधार की भूमिका निभाता है।









