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बुधवार, सितंबर 27, 2023

गुनगुनी धूप सी कविताओं का संग्रह 'गुनगुनी धूप में कविता"

लघु कविता-संग्रह - गुनगुनी धूप में कविता 
कवि - बलबीर सिंह वर्मा 'वागीश'
प्रकाशक - आनंद कला मंच प्रकाशन, भिवानी 
पृष्ठ - 120 
मूल्य - 250 / -
लघु कविता इन दिनों स्वतंत्र विधा के रूप में फल-फूल रही है। हर महीने अनेक लघु कविता संग्रहों का प्रकाशन हो रहा है। बलबीर सिंह वर्मा 'वागीश' का लघु कविता संग्रह 'गुनगुनी धूप में कविता' इसी श्रृंखला की एक कड़ी है। 

बुधवार, मार्च 25, 2020

सहज रूप से ग्राह्य कविताओं का संग्रह

लघुकविता-संग्रह - दिन ढल रहा था कवि - रूप देवगुण प्रकाशक - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल कीमत - ₹250/- पृष्ठ - 80 ( सजिल्द )
सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल से प्रकाशित "दिन ढल रहा था" रूप देवगुण की लघु कविताओं का संग्रह है, जिसमें 67 लघु कविताएँ 6 अध्य्यायों में विभक्त है। इनकी समरूपता इनके आकार को लेकर है। सभी कविताएँ 10-10 पंक्तियों की है। एक अध्याय में एक ही विषय की कविताएँ हैं या हम कह सकते हैं कि एक विषय पर कवि ने अलग-अलग बिम्बों को या अपने अलग-अलग दृष्टिकोण को एक साथ बयान किया है। 

बुधवार, मार्च 18, 2020

प्रदूषित हो रही गंगा के प्रति चिंता दिखाता संग्रह

लघुकविता-संग्रह - मासूम गंगा के सवाल कवयित्री - शील कौशिक प्रकाशक -साहित्यसागर, जयपुर पृष्ठ - 128 कीमत - ₹200/-
मासूम गंगा के सवाल" गंगा पर केंद्रित 108 लघुकविताओं का संग्रह है और इस अनूठी कृति की रचना की है शील कौशिक ने। साहित्यसागर, जयपुर से प्रकाशित इस कृति के बारे में कवयित्री का खुद का कहना है -
"मैं केवल आस्तिकता या अंधविश्वास का ढोल गले में बाँधकर नहीं पीट रही, बल्कि यह काव्य कृति गंगा को मानवीय दृष्टि से देखने का प्रयास मात्र है।" ( पृ. - 6 )

बुधवार, मार्च 11, 2020

भाषायी आडम्बर से मुक्त सरल और बोधगम्य कविताओं का संग्रह

लघुकविता-संग्रह - जो मैं न कह सका कवि - रूप देवगुण प्रकाशन - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल कीमत - ₹300/- पृष्ठ - 111 ( सजिल्द )
सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल से प्रकाशित रूप देवगुण कृत "जो मैं न कह सका" लघु कविताओं का संग्रह है। इसमें 91 कविताओं को 8 अध्यायों में बाँटकर प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक अध्याय के आगे एक लघु आलेख है, जिसमें कवि ने अध्याय के विषय में अपने विचार रखे हैं।

मंगलवार, जुलाई 10, 2018

जीवन के कण-कण में कविता देखता संग्रह

लघुकविता-संग्रह – खिड़की खोल कर तो देखो 
कवि - डॉ. रूप देवगुण 
प्रकाशन – अक्षरधाम प्रकाशन 
पृष्ठ – 80 
कीमत – 150 /- ( सजिल्द )
‘ खिड़की खोल कर तो देखो ’ 118 लघुकविताओं का गुलदस्ता है जो गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी, बादलों के आने की बात करते हैं, नदी का करिश्मा देखना हो, ओढ़ कर एक लम्बी खामोशी, गली नदी बन गई है, खिड़की खोल कर तो देखो, रोटियाँ खा गईं हमारे बचपन को, पुल पर जगमगाती रौशनी, रात इतनी बुरी तो नहीं, सपनें सपनों को भोगते हैं और झंकृत हो गए मन के तार नामक ग्यारह भागों में विभक्त है |

सोमवार, जुलाई 02, 2018

लघु आकार में बड़ी बातें करती कविताएँ


लघुकविता संग्रह – रास्ता तय करते-करते
कवि – डॉ. रूप देवगुण
प्रकाशन – राज पब्लिशिंग हॉउस
पृष्ठ – 88
कीमत – 125 / - ( सजिल्द )
रास्ता तय करते-करते डॉ. रूप देवगुण जी की 123 लघुकविताओं का संग्रह हैं, जिनको उन्होंने सात भागों में विभाजित किया है | ये सात भाग हैं – चलो चलें पहाड़ पर, नाराज भी हो जाता है समुद्र, यह फाग है कि रंगों का मौसम, आज मैं बहुत उदास हूँ, सारे आकाश को अपने भीतर, अच्छा हूँ न मैं और अपना भी हो जाता है अजनबी | इन शीर्षकों से ही अंदाज लगाया जा सकता है कि कवि का मुख्य स्वर प्रकृति का चित्रण है | इस संग्रह में प्रकृति का वर्णन अधिकांशत: आलम्बन रूप में ही हुआ है, इसके अतिरिक्त कवि आत्म चिन्तन भी करता दिखता है | प्रकृति के माध्यम से वह जीवन दर्शन की बात भी करता है |

बुधवार, जनवरी 24, 2018

सरल-सहज भाषा की प्रभावशाली लघुकविताएँ

लघुकविता-संग्रह - चाँदनी रात में उड़ते बगुले 
कवि - रूप देवगुण 
प्रकाशक - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल 
पृष्ठ - 80 
मूल्य - 250 /- ( सजिल्द )
आकार में क्षणिका से बड़ी और कविता से छोटी होती है लघुकविता  | लघुकविता साहित्य की नई विधा है और लघुकथा की तरह ही अपनी जगह बना रही है | प्रो. रूप देवगुण इस विधा के प्रमुख हस्ताक्षर हैं | उनकी सदी प्रकाशित कृति " चाँदनी रात में उड़ते बगुले " 120 लघुकविताओं का संग्रह है, जो 9 खंडों में विभक्त है |

बुधवार, सितंबर 28, 2016

प्राकृतिक सौन्दर्य के माध्यम से जीवन का सच कहती कविताएँ

कविता-संग्रह - खिड़की से झांकते ही 
कवयित्री - डॉ. शील कौशिक 
प्रकाशक - सुकीर्ति प्रकाशन 
पृष्ठ - 112
कीमत - 250 / - सजिल्द  
समाज, संसार और सृष्टि वैसी ही है, जैसा कोई उसे देखता है । बड़ी-से-बड़ी बुराई यहाँ मौजूद, खूब अच्छाइयाँ विद्यमान हैं । एक तरफ कुरूपता के मंज़र हैं तो दूसरी तरफ अथाह सौंदर्य है । अपनी-अपनी खिड़कियों से सब झाँकते हैं और सारे दृश्यों में से वही देख पाते हैं, जो वो देखना चाहते हैं । निस्संदेह एक कवि को समाज के कुरूप पक्ष को उद्घाटित करना चाहिए लेकिन इस सृष्टि की सुंदरता को भी नकारा नहीं जा सकता । कवि और लेखक चिंतनशील जीव होते हैं और समाज का कुरूप चेहरा जब उन्हें अवसाद की तरफ धकेलने लगता है, तब प्रकृति का सान्निध्य उनमें नई ऊर्जा का संचार करता है । प्रकृति संग गुजारे पल जब कविता का रूप धारण करते हैं तब ये शब्द पाठक को भी जीवन के तनाव से मुक्ति देते हैं । सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. शील कौशिक का कविता-संग्रह " खिड़की से झाँकते ही " इसी तरह का संग्रह है जो अपनी खिड़की से सुंदर प्रकृति को देखता है । इस संग्रह में 153 कविताएँ हैं जो 10 भागों में विभक्त हैं । ये भाग है - पहाड़ से मुलाकात, भीगीं मुस्कानें लिए बादल, आमंत्रण पेड़ का, प्रकृति करे पुकार, जादूगर चाँद, चिड़िया का गीत, फूलों की बारात, नजारा बारिश का, रोता है समुद्र और हवा से गुफ्तगू व अन्य । इन भागों के शीर्षक ही इस काव्य-संग्रह की विषय-वस्तु बयान कर रहे हैं । कवयित्री ने प्रकृति को बड़े करीब से देखा है, वह उनसे संवाद करती है और उनके माध्यम से जीवन के सच को उद्घाटित भी करती है ।

सोमवार, अगस्त 08, 2016

क्षण विशेष को चित्रित करती लघु कविताएँ

कविता संग्रह – पत्तों से छनकर आई चाँदनी
कवि – रूप देवगुण
प्रकाशक - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल
पृष्ठ - 86
मूल्य - 200 / -  ( सजिल्द )
साहित्य समाज सापेक्ष होता है | आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लम्बी विधाओं को पढ़ने का समय लोगों के पास कम ही है | लघुकथा इसी कारण आज एक लोकप्रिय विधा बन चुकी है | यूं तो लघु कविताएँ भी समय-समय पर लिखी जाती रही हैं, लेकिन अभी तक इन्हें अलग विधा के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता, लेकिन रूप देवगुण जी इसे अलग विधा के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इसी कड़ी में उन्होंने लघु कविताओं का तीसरा संकलन “ पत्तों से छनकर आई चाँदनी ” साहित्य जगत को दिया है | इस संग्रह में उन्होंने 119 लघु कविताओं को 10 शीर्षकों के अंतर्गत रखा है | 

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