BE PROUD TO BE AN INDIAN

बुधवार, मार्च 30, 2016

आरक्षण की बैसाखियाँ आखिर कब तक ?

एक तरफ भारत विकसित देशों की कतार में खड़ा होने को आतुर है, तो दूसरी तरफ भारत के लोग खुद को पिछड़ा साबित करने की होड़ में लगे हुए हैं | राजस्थान के गुर्जरों और गुजरात के पटेलों के बाद अब हरियाणा के जाटों ने इस श्रृंखला में अपना नाम लिखवा दिया है | भारत में किसी भी मांग के लिए जब प्रदर्शन होता है तो सरकारी सम्पत्ति को जलाना, तोड़-फोड़ करना आम बात है, ऐसे में हर प्रदर्शन के दौरान देश को करोड़ों की चपत लग जाती है | इस बार हरियाणा में वहशियत का जो नंगा नाच हुआ, वह तो शर्मनाक है | भीड़ पर किसी का नियन्त्रण नहीं होता, आंदोलनकर्ताओं की मंशा भले ही ऐसी न हो, लेकिन भीड़ में शामिल शरारती तत्व अक्सर मौके का फायदा उठा जाते हैं, लेकिन ऐसा तभी संभव है जब आन्दोलन होता है | सोचने की बात तो यह है कि आजाद देश में आखिर ऐसी नौबत क्यों आती है कि लोगों को सडकों पर उतरना पड़ता है ? यहाँ तक आरक्षण की बात है, यह विचारणीय है कि क्यों लोग खुद को पिछड़ा कहलवाने के लिए हिंसक हो रहे हैं ? आरक्षण की बैसाखियाँ आखिर कब तक जरूरी हैं ?

सोमवार, मार्च 21, 2016

अपने समय की तमाम विसंगतियों को ललकारता हुआ संग्रह

कविता संग्रह - समय से मुठभेड़ 
शायर - अदम गौंडवी 
प्रकाशक - वाणी प्रकाशन 
कीमत - 75 / - पेपरबैक 
पृष्ठ - 108
अदम गोंडवी का  कविता / ग़ज़ल संग्रह  ' समय से मुठभेड़ ' अपने समय की तमाम विसंगतियों को ललकारता हुआ संग्रह है | इस संग्रह में 63 ग़ज़लें, 14 मुक्तक और 3 नज़्में हैं | 

मंगलवार, मार्च 08, 2016

यथार्थवादी, आदर्शवादी और मनोवैज्ञानिक कहानियों का संग्रह

कहानी संग्रह - लेखक की आत्मा 
लेखिका - अर्चना ठाकुर 
प्रकाशन - अंजुमन प्रकाशन 
पृष्ठ - 112
कीमत - 120 / - 
( साहित्य सुलभ श्रृंखला के अंतर्गत 20 / )
यथार्थवादी, आदर्शवादी और मनोवैज्ञानिक प्रवृतियों को समेटे हुए है ' अर्चना ठाकुर ' का पहला कहानी-संग्रह " लेखक की आत्मा ", हालांकि कहीं-कहीं यथार्थवाद और आदर्शवाद अति की सीमाओं को भी छूता प्रतीत होता है । इस संग्रह की बारह कहानियों में एक तरफ सात्विक प्रेम है, तो दूसरी तरफ बदले की कहानी है । लेखक के दुःख का ब्यान भी हुआ है और मनोवैज्ञानिक समस्याओं को भी बड़ी बखूबी उठाया गया है ।

बुधवार, फ़रवरी 24, 2016

समीक्षा “महाभारत जारी है” ( समीक्षक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' )

कुछ दिनों पूर्व मुझे स्पीडपोस्ट से “महाभारत जारी है” नाम की एक कृति प्राप्त हुई। मन ही मन मैं यह अनुमान लगाने लगा कि यह ऐतिहासिक काव्यकृति होगी। “महाभारत जारी है” के नाम और आवरण ने मुझे प्रभावित किया और मैं इसको पढ़ने के लिए स्वयं को रोक न सका। जब मैंने “महाभारत जारी है” को सांगोपांग पढ़ा तो मेरी धारणा बदल गयी। जबकि इससे पूर्व में प्राप्त हुई कई मित्रों की कृतियाँ मेरे पास समीक्षा के लिए कतार में हैं।

मंगलवार, फ़रवरी 16, 2016

प्रकृति के माध्यम से जीवन को देखती कविताएँ

कविता संग्रह - धूप मुझे है बुला रही 
कवि - रूप देवगुण 
प्रकाशन - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल 
पृष्ठ - 104 ( सजिल्द )
कीमत - 250 रु -
रूप देवगुण प्रकृति के चितेरे कवि हैं | उनके कुछ कविता संग्रहों के नाम, यथा- गुलमोहर मेरे आंगन में, पहाड़ के बादल अभिनय करते हैं, दुनिया भर की गिलहरियाँ, नदी की तैरती-सी आवाज़, इस बात के द्योतक हैं | प्रकृति से इस लगाव की अगली कड़ी है कविता-संग्रह " धूप मुझे है बुला रही  " |

मंगलवार, फ़रवरी 09, 2016

जिंदगी का गहन विश्लेषण करता कविता संग्रह

कविता संग्रह - ज़िंदगी...कुछ यूं ही 
कवि - सुधाकर पाठक 
प्रकाशक - वाणी प्रकाशन 
कीमत - ₹ 225  / - ( सजिल्द )
पृष्ठ - 110 
जिंदगी...कुछ यूँ ही ” सुधाकर पाठक जी का प्रथम कविता संग्रह है | उनकी कविताएँ इससे पूर्व “ सहोदरी सोपान – 1 ” में आ चुकी हैं, लेकिन स्वतंत्र रूप से यह उनका प्रथम प्रयास है | इस संग्रह को देखते हुए यह आभास बिल्कुल भी नहीं होता कि यह संग्रह किसी नवागत कवि का है | सुधाकर पाठक की कविताएँ पर्याप्त प्रौढ़ता लिए हुए हैं, जो यह बताता है कि कवि ने आमतौर पर नए कवियों की तरह हडबडाहट में कविता-संग्रह प्रकाशित करवाने की अपेक्षा परिपक्व होने के बाद ही कविता-संग्रह प्रकाशित करवाने का निर्णय लिया है |

मंगलवार, फ़रवरी 02, 2016

सनसनीखेज कथानक और खिचड़ी भाषा का उपन्यास

उपन्यास - बनारस टॉकीज़ 
लेखक - सत्य व्यास 
प्रकाशक - हिन्द युग्म 
पृष्ठ - 192 ( पेपरबैक )
कीमत - 115 / - 
बनारस टॉकीज़ BHU के BD होस्टल की कहानी है| यह सनसनी पर आधारित है| लेखक सत्य व्यास ने ज़िग ज़िग्लरकी उक्ति, 
"हर घटना के पीछे कोई कारण होता है| संभव है कि यह घटित होते वक्त आपको न दिखे; लेकिन अंततः जब यह सामने आएगा, आप सन्न रह जाएंगे|
शुरूआत में दी है, और यह उपन्यास इसी उक्ति का मूर्त रूप है |

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