काव्य-संग्रह - निदा फ़ाज़ली ( ग़ज़लें, नज़्में, शे 'र और जीवनी )
संपादक - कन्हैयालाल नन्दन
प्रकाशन - राजपाल
पृष्ठ - 160 ( पेपरबैक )
कीमत - 150 / -
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए ।
हिंदी-उर्दू शायरी का शौकीन ऐसा कौन है, जो इन पंक्तियों से अपरिचित होगा । इन पंक्तियों के शायर हैं - निदा फ़ाज़ली । राजपाल प्रकाशन के आज के प्रसिद्ध शायर श्रृंखला में " निदा फ़ाज़ली : गज़लें, नज़्में, शे'र और जीवनी " पुस्तक का संपादन किया है - कन्हैयालाल नन्दन ने । इस पुस्तक में शामिल रचनाओं में निदा फ़ाज़ली के फलसफे को बड़ी आसानी से समझा जा सकता है ।






