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शनिवार, मार्च 14, 2015

हिंदी में साहित्य अकादमी पुरस्कार

भारत की साहित्य अकादमी भारतीय साहित्य के विकास के लिये सक्रिय कार्य करने वाली राष्ट्रीय संस्था है। इसका गठन 12  मार्च 1954 को भारत सरकार द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य उच्च साहित्यिक मानदंड स्थापित करना, भारतीय भाषाओं और भारत में होनेवाली साहित्यिक गतिविधियों का पोषण और समन्वय करना है। सन् 1954 में अपनी स्थापना के समय से ही साहित्य अकादमी प्रतिवर्ष भारत की अपने द्वारा मान्यता प्रदत्त प्रमुख भाषाओं में से प्रत्येक में प्रकाशित सर्वोत्कृष्ट साहित्यिक कृति को पुरस्कार प्रदान करती है। पहली बार ये पुरस्कार सन् 1955 में दिए गए।
                         पुरस्कार की स्थापना के समय पुरस्कार राशि 5,000/- रुपए थी, जो सन् 1983 में ब़ढा कर 10,000/- रुपए कर दी गई और सन् 1988 में ब़ढा कर इसे 25,000/- रुपए कर दिया गया। सन् 2001 से यह राशि 40,000/- रुपए की गई थी। सन् 2003 से यह राशि 50,000/- रुपए कर दी गई है।
हिन्दी में दिए गए साहित्य अकादमी पुरस्कारों की सूची

शनिवार, फ़रवरी 28, 2015

ज्ञानपीठ पुरस्कार

ज्ञानपीठ पुरस्कार की शुरुआत 1965 में हुई । 1968 में हिंदी के लिए पहला ज्ञानपीठ (सुमित्रानन्दन पंत की कृति चिदम्बरा को ) मिला । शुरुआत में यह पुरस्कार कृति को दिया जाता था लेकिन 1982 में कृति के लिए अंतिम ज्ञानपीठ ( महादेवी वर्मा की कृति यामा को ) दिया गया । इसके बाद यह कृति विशेष की बजाए साहित्यकार को दिया जाने लगा । 

हिंदी की झोली में आए ज्ञानपीठ पुरस्कार -

गुरुवार, सितंबर 11, 2014

आदिकाल का आरंभ और हिंदी का प्रथम कवि

किसी भी भाषा के साहित्य से जुड़ा हुआ प्रथम प्रश्न होता है कि पहला कवि कौन-सा था और भाषा विशेष में साहित्य सृजन कब से हुआ | हिंदी भी इस प्रश्न से अछूती नहीं | साहित्येतिहासकारों ने अपने-अपने तर्कों के साथ इन प्रश्नों के उत्तर दिए हैं | कुछ प्रमुख मत निम्नलिखित हैं -

हिंदी साहित्य का आरंभ -


बुधवार, जून 26, 2013

हिंदी साहित्य : काल विभाजन एवं नामकरण

साहित्य किसी भी भाषा का हो जब उसका इतिहास लिखा जाता है तो सबसे बड़ी समस्या उसके काल विभाजन और कालों के नामकरण की होती है । हिंदी भी इससे अछूती नहीं । हिंदी में काल विभाजन का प्रथम प्रयास सर जार्ज ग्रियर्सन ने किया लेकिन उनके द्वारे दिए गए नाम अध्यायों के शीर्षक अधिक हैं । मिश्र बन्धुओं ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया , भले ही उनका काल विभाजन सही नहीं माना जा सकता ( क्योंकि हिंदी की शुरुआत दसवीं सदी से हुई मानी जाती है ऐसे में हिंदी साहित्य की शुरुआत आठवीं सदी से नहीं मानी जा सकती , यह दोष अन्य विद्वानों के काल विभाजन में भी है ) लेकिन इस दिशा में उनका कदम उठाना सराहनीय है , इसके बाद के लगभग हर साहित्येतिहासकार ने इस दिशा में काम किया ।  

कुछ प्रमुख विद्वानों के मत -

शनिवार, जून 22, 2013

रास और रासो

आदिकालीन साहित्य में रास और रासो साहित्य का विशेष स्थान है । रास साहित्य जैन परम्परा से संबंधित है तो रासो का संबंध अधिकांशत: वीर काव्य से जो डिंगल भाषा में लिखा गया । रास और रासो शब्द की व्युत्पति संबंधी विद्वानों में मतभेद है । कुछ मत निम्न हैं -

शुक्रवार, जून 21, 2013

आधुनिक काल के प्रमुख साहित्यकार ( भाग - 1 )

आधुनिक काल की शुरुआत भारतेंदु काल ( 1857 -1900 ई . ) से मानी जाती है । भारतेंदु मंडल के कवियों ( भारतेंदु हरिश्चन्द्र, बदरीनारायण चौधरी प्रेमघन , प्रताप नारायण मिश्र , अम्बिका दत्त व्यास, बालमुकन्द गुप्त , राधाचरण गोस्वामी, राधाकृष्ण दास ) से नए युग का सूत्रपात हुआ लेकिन इनसे पूर्व के कुछ कवि ( सेवक सरदार, राज लक्ष्मण सिंह, गोविन्द गिल्लाभाई आदि ) ऐसे भी हुए जिन्हें रीतिकाल के बाद के माना गया लेकिन वे भारतेंदु युग से पूर्व के थे इन्हें पूर्व प्रवर्तित काव्य परम्परा के कवि कहा जाता है । 
                19 वीं सदी में जन्में प्रमुख साहित्यकार ( जन्म के क्रम पर आधारित ) निम्न हैं -  

बुधवार, जून 19, 2013

हिंदी साहित्य का इतिहास लेखन ( भाग - 2 )

भाग एक से आगे 

5. मिश्र बन्धु - 

                   तीन भाई - 
  1. प. गणेश बिहारी मिश्र 
  2. डॉ. श्याम बिहारी मिश्र 
  3. डॉ. शुकदेव बिहारी मिश्र 
पुस्तक - " मिश्रबन्धु विनोद " ( चार भाग ) 
प्रकाशन - प्रथम तीन भाग -1913
                चौथा भाग (  काल ) - 1914 
" हिंदी नवरत्न " - मिश्र बन्धु विनोद के प्रथम तीन भागों का पूरक 

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