BE PROUD TO BE AN INDIAN

मंगलवार, नवंबर 17, 2015

बाल साहित्य को समृद्ध करता कविता-संग्रह

कविता संग्रह - दादी ने पूछा लड्डू से
कवि - डॉ. मेजर शक्तिराज
पृष्ठ - 80
कीमत - ₹ 200/
प्रकाशन - अमृत बुक्स, कैथल ।
बाल साहित्य हालांकि साहित्य का ही एक रूप है लेकिन यह सामान्य साहित्य से कुछ हटकर होता है । सामान्य साहित्य में साहित्यकार अपनी बात कहते समय सिर्फ़ ख़ुद में मग्न होता है, सामने वाला उसके ध्यान में नहीं होता । पाठक के अनुसार भाषा, भाव चुनने की कोई बाध्यता उसे नहीं होती लेकिन बाल साहित्य लिखते समय यह बाध्यता रहती है । बाल साहित्य लिखते समय अगर बच्चों की वय, रूचि का ध्यान नहीं रखा गया तो ऐसे बाल साहित्य की सफलता संदिग्ध हो जाती है । यानी बाल साहित्य लिखते समय साहित्यकार को अपने स्तर पर रहकर नहीं अपितु बालकों के स्तर पर उतरकर लिखना होता है क्योंकि तभी बालक समझ पाएंगे अन्यथा विद्वता भरी बातें बालकों के सिर से ऊपर निकल जाएँगी । 

साहित्य और बाल साहित्य में एक अन्य अंतर यह भी है कि सामान्यतः साहित्य में उद्देश्य प्रत्यक्ष न होकर परोक्ष होता है जबकि बाल साहित्य का सोद्देश्य होना अनिवार्य है । मनोरंजन करना, अच्छी आदतों का निर्माण करना और पढ़ाई में रूचि जगन बाल साहित्य के प्रमुख उदेश्य हैं और बाल साहित्य से जुड़ी किसी भी पुस्तक की श्रेष्ठता इन्हीं से सिद्ध होती है ।
डॉ. मेजर शक्तिराज साहित्य जगत को दोहा संग्रह, ग़ज़ल संग्रह, कविता संग्रह दे चुके हैं, अब उनकी क़लम बाल साहित्य पर चली है । " दादी ने पूछा लड्डू से " उनकी बाल कविताओं की कृति है, इसमें 52 कविताएँ हैं । प्रथम कविता सरस्वती वन्दना के रूप में है, शेष 51 कविताएँ विभिन्न विषयों पर हैं और ये सभी बालमन को समझते हुए लिखी गई हैं । बालकों को पशु-पक्षियों से बेहद प्यार होता है । मेरा टोनी, मिट्ठू तोता, चिड़ियाघर, कोयल। और कौआ, प्यासा कौआ जैसी अनेक कविताओं के माध्यम से कवि ने बालकों की इस रूचि को समझा है ।प्यासा कौआ की बहुप्रचलित कहानी को उन्होंने कविता में ढाला है । तुकांत और लय के कारण कविता को याद करना आसान होता है, इस दृष्टिकोण से प्यासा कौआ कहानी बड़ी सरलता से बच्चों की जुबान पर चढ़ जाएगी । साथ ही कवि बड़ा सुंदर सन्देश भी देता है -
तुम भी कभी न हिम्मत हारो
बल-बुद्धि से काज संवारो । ( पृ. - 61 )
इसी तरह बन्दर बाँट या दो बिल्लियों की लड़ाई की बहुप्रचलित कहानी को कवि ने बन्दर का फ़ैसला कविता में बाँधा है और अंत में दोहे के माध्यम से सुंदर सन्देश प्रेषित किया है -
झगड़ा कभी न तुम करो, रात दिवस या भोर 
तीजा घुस खा जायेगा, तनिक चले न जोर । ( पृ . - 59 )
शेर-चूहे की कहानी पर आधारित कविता है "क्षमा बड़न को चाहिए " । इस कविता का निष्कर्ष भी कवि ने दोहे के रूप में दिया है - 
सदा बड़न को चाहिए, करें क्षमा का दान 
क्या जाने किस विपत में, कौन आ जाए काम । ( पृ. - 51 )
कोयल की चालाकी को कवि ने ' कोयल और कौवा ' कविता में बताया है । बच्चों को कुत्तों से कितना प्यार होता है, इसका सटीक चित्रण ' मेरा टोनी ' कविता में मिलता है और ' मिट्ठू तोता ' कविता में टोटे की सुंदरता का सुंदर शब्दों में चित्रण किया गया है -
लाल चोंच है, पंख हरे हैं
मिट्ठू जी सुंदर सुथरे हैं । ( पृ. - 33 )
चिड़ियाघर कविता के माध्यम से कवि ने सभी जानवरों से परिचय करवाया है लेकिन यह परिचय सिर्फ़ नाम गिनवाने तक सीमित न रहकर उनके खान-पान की आदतों और व्यवहार तक जाता है ।
गेंडे का तो बड़ा नाक है
हट्टा-कट्टा खतरनाक है । ( पृ. - 38 )
चन्दा मामा तो चिरकाल से बच्चों को प्रिय रहा है । कवि की सजग क़लम इस विषय को कैसे छोड़ सकती थी, लेकिन यह कविता पारम्परिक ढंग की न होकर वैज्ञानिकता पर आधारित है -
घटते-घटते जीरो बनते
बढ़ते-बढ़ते हीरो बनते । ( पृ. - 36 )
चन्दा के बाद मोबाइल और कम्प्यूटर आज के युग के बच्चों की प्रिय वस्तुएँ हैं । कवि ने कम्प्यूटर के नुक्सान बड़ी सुंदरता से व्यक्त किए हैं -
नई उम्र में भी बच्चों को 
सर्वाइकल की बुरी ख़बर । ( पृ. - 46 )
मोबाइल कविता में कवि ने मोबाइल के लाभ-हानि का सटीक चित्रण किया है ।
बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं और बड़ों से प्रश्नों के उत्तर चाहते हैं । बच्चे माँ से प्रकृति के बारे में जो प्रश्न पूछते हैं, कवि ने उन्हें ' सूरज और बादल ' कविता में लिखा है -
धरा गगन की गोद में सूरज 
साँझ ढले क्यों है छुप जाता । ( पृ. - 37 )
' क्यों ' कविता में भी इसी तरह के अनेक प्रश्न हैं, जिनका उत्तर बच्चा पाना चाहता है -
मुझको गोदी में बिठला कर, बातें सब समझाओ तुम 
मेरे सभी सवालों के उत्तर, मुझको बतलाओ तुम । ( पृ. - 48 )
घर, परिवार और रिश्तों को लेकर अनेक कविताएँ इस संग्रह में हैं -
कितना प्यारा मेरा घर है
रहता सदा साफ़-सुंदर है । ( पृ. - 18 )
' परिवार ' कविता में दादा, दादी, चाचा, पापा, मम्मी, बुआ का जिक्र तो है ही ' गौरी गां ' का जिक्र भी है जो यह बताता है कि बच्चे किस प्रकार घर के पालतु पशु-पक्षियों को भी घर का सदस्य मानते हैं । 'प्यारी बहना' और 'सोनू भैया' कविताओं में बहन और भाई का चित्रण है ।
कवि ने गाँव के घर का चित्रण किया है, जो विशेषकर शहरी बच्चों के लिए जिज्ञासा भरपूर और ज्ञानवर्धक है -
बन्धी हुई घर के आँगन में, इक प्यारी-सी माँ 
पास बन्धी है इक बछिया भी, वो बोले बां-बां । ( पृ. - 40 )
मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान देना, अच्छी आदतों के निर्माण करने के उद्देश्य के संदर्भ में भी कविता-संग्रह 'दादी ने पूछा लड्डू से ' खरा उतरता है -
अगर लक्ष्य को पाना है 
ख़ुद को स्वस्थ बनाना है । ( पृ. - 51 )
या फिर 
जो हिम्मत से लेता काम 
जीते वही फर्स्ट ईनाम । ( पृ. - 50 )
पढ़ाई को रूचिकर बनाने के लिए कवि ने कई कविताओं का सृजन किया है । 'अ से अनार ' कविता में स्वर और 'क से कबूतर ' कविता में व्यंजन ज्ञान दिया गया है । ' मात्राएँ ' कविता में क पर बारहखड़ी लगाकर मात्राओं का ज्ञान दिया गया है । ' गिनती ' कविता में एक से दस तक की गिनती सिखाई गई है और ग्यारह से बीस तक की गिनती सिखाने के लिए 'दस और एक ग्यारह' कविता है । ' पहाड़े ' कविता में दो का पहाड़ा सिखाया गया है और यह इतना रोचक है कि बच्चे इसे पढ़ाई समझकर नहीं अपितु खेल समझकर सीखेंगे । 
इस संग्रह में संवादात्मक कविताओं की संख्या काफी है । कविता-संग्रह का शीर्षक भी यही बताया है । ' पिंकी ने पूछा मम्मी से ', ' पिंकी ने पूछा पापा से ' भी इसी श्रेणी की कविताएँ हैं । दरअसल बच्चे बड़ों से सदा प्रश्न करते रहते हैं । कवि का इस प्रकार की कविताओं का सृजन करना बताता है कि उन्हें बालमन की गहन जानकारी है ।
त्योहारों का महत्त्व बताती, देशभक्ति की भावना जगाती, शोर रोकने, बिजली पानी बचाने जैसे मुद्दों पर जागरूक करती कविताएँ भी इस संग्रह में हैं ।
संक्षेप में, जीवन के हर पहलू से बच्चों को कवि ने परिचित करवाया है । इन कविताओं को पढ़ते-पढ़ते बच्चे अनजाने में ही वे सब बातें सीख जाएँगे जो कोई भी माँ-बाप अपने लाड़लों को सिखाना चाहता है । उपदेश कहीं भी उपदेश नहीं लगता, ज्ञान कहीं भी ज्ञान नहीं लगता, ये सब बातें कविता के आकर्षक और स्वादिष्ट खोल के भीतर छुपी हैं । यही बाल साहित्य का उद्देश्य होता है, जिसमें डॉ. मेजर शक्तिराज पूर्ण रूप से सफल रहे हैं । निस्संदेह इस पुस्तक से बाल साहित्य समृद्ध हुआ है ।
******
******

2 टिप्‍पणियां:

Asha Saxena ने कहा…

जब पुस्तक समीक्षा इतनी बढ़िया है तो किताब कितनी बढ़िया होगी सोच रही हूँ |

Kavita Rawat ने कहा…

बाल साहित्य कविता-संग्रह " दादी ने पूछा लड्डू से "
में डॉ. मेजर शक्तिराज जी ने विविध विषयों पर बहुत सुन्दर बाल रचनाएँ रची है, यह आपकी समीक्षा से स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है .....मेजर को "दादी ने पूछा लड्डू से" पुस्तक प्रकाशन पर हार्दिक बधाई एवं आपका समीक्षा हेतु आभार!

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...