BE PROUD TO BE AN INDIAN

मंगलवार, जनवरी 17, 2017

रूप देवगुण की कहानियों में प्रेम का स्वरूप

रूप देवगुण की कहानियों में प्रेम के ये सब रूप पवित्रता और अपवित्रता के साथ विद्यमान हैं | रूप देवगुण के चार कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं | पहला कहानी-संग्रह “ मैं+तुम=हम ” 1983 में प्रकाशित हुआ, दूसरा कहानी-संग्रह “ छतें बिन मुंडेर की ” 1985 में, तीसरा कहानी-संग्रह “ कब सोता है यह शहर ” 1992 में और चौथा कहानी-संग्रह “ अनजान हाथों की इबारत ” 2004 में प्रकाशित हुआ | इन चार संग्रहों के अतिरिक्त उनकी चुनिन्दा कहानियों के तीन संकलन भी प्रकाशित हुए, लेकिन उनमें इन्हीं संग्रहों की कहानियाँ हैं | अत: मूल रूप से उनके यही चार कहानी संग्रह हैं और इनमें 45 कहानियाँ संकलित हैं | प्रेम का वर्णन न्यूनाधिक मात्रा में उनके चारों संकलनों की कहानियों में मिलता है |

बुधवार, जनवरी 04, 2017

कहानी और प्रेम

कहानी का इतिहास उतना ही पुराना है, जितना मानवीय जीवन, क्योंकि कहानी मानवीय स्वभाव का हिस्सा है | हर आदमी किसी-न-किसी रूप में कहानी सुनता और सुनाता है | जीवन की हर घटना कहानी का विषय बनती है, ऐसे में प्रेम, जो जीवन का अहम् हिस्सा है, कहानियों से अलग कैसे रह सकता है | प्रेम क्या है ?, इसके बारे में सबका अपना-अपना नज़रिया है | प्रेम के समर्थन में बड़े-बड़े दावे भी किए जाते हैं, और प्रेम को लेकर ही तलवारें भी खिंचती हैं, ऑनर किलिंग होती है | इसके संकुचित और विस्तृत अर्थ समाज में सदा से साथ-साथ व्याप्त रहे हैं | प्रेम को भले किन्हीं भी अर्थों में व्यक्त किया जाए, प्रेम के बारे में यह निश्चित है कि इसके बिना समाज का निर्माण हो ही नहीं सकता; मानव समाज ही नहीं, पशुओं के दल भी इसी भाव पर एकत्र रहते हैं | आखिर ऐसा क्या है प्रेम में ? क्या यह एक-दूसरे की ज़रूरतों की पूर्ति का माध्यम है ? 

मंगलवार, दिसंबर 27, 2016

प्रबंध और मुक्तक काव्य का मिला-जुला रूप

काव्य-संग्रह - पुरुषोत्तम 
कवयित्री - मनजीतकौर मीत 
प्रकाशक - अमृत प्रकाशन, दिल्ली 
पृष्ठ - 128 ( सजिल्द ) 
कीमत - 200 /-
इतिहास और मिथिहास के अनेक पात्र कवि हृदयों को आकर्षित करते आए हैं, लेकिन जिन पर पूर्व में विस्तार से लिखा जा चुका हो, उन्हें पुन: लिखना बहुत बड़ी चुनौती होता है और जब रामचरितमानस जैसा महाकाव्य उपलब्ध हो तब वही राम कथा लिखना अत्यधिक साहस की मांग करता है | कवयित्री " मनजीतकौर मीत " ने अपनी पहली पुस्तक " पुरुषोत्तम " का सृजन करते हुए ये साहस दिखाया है, जिसके लिए वे बधाई की पात्र हैं | ' पुरुषोत्तम ' प्रबंध और मुक्तक काव्य का मिला-जुला रूप कहा जा सकता है | इसमें रामकथा क्रमानुसार है, लेकिन इसमें शामिल जो 70 रचनाएँ हैं, वे अपने आप में स्वतंत्र भी हैं |

मंगलवार, दिसंबर 20, 2016

सामाजिक सोच में परिवर्तन की तड़फ है काव्य-संग्रह

समीक्षक – डॉ. अनिल सवेरा 
829, राजा गली, जगाधरी 
हरियाणा – 135003
मो. – 94163-67020
प्राप्ति स्थान - 1. Redgrab 
                       2. Amazon
महाभारत जारी है ’ कवि दिलबागसिंह विर्क रचित नवीनतम काव्य-संग्रह है, जिसे उन्होंने सामर्थ्यवान लोगों की बेशर्म चुप्पी को समर्पित किया है | कवि के भीतर भी एक महाभारत मची है | उसी का परिणाम है यह काव्य-संग्रह | कवि समाज की सोच में परिवर्तन चाहता है | ऐसा परिवर्तन, जिससे समाज में सुधार हो | ‘ चश्मा उतार कर देखो ’, ‘ अपाहिज ’, और ‘ मेरे गाँव का पीपल ’ इसी विषय पर आधारित रचनाएं हैं | 

सोमवार, दिसंबर 12, 2016

लिव-इन-रिलेशनशिप को जायज ठहराता नॉवेल

नॉवेल - मुसाफ़िर Cafe
लेखक - दिव्य प्रकाश दुबे 
प्रकाशक - हिन्द युग्म & Westland Ltd.
कीमत - 150 /-
पृष्ठ - 144 ( पेपरबैक )
हिंदी ‘ नॉवेल ’ | उपन्यास को अब नॉवेल ही कहना ठीक होगा | हिंदी उपन्यास को पढ़ते हुए जब अंग्रेजी शब्दकोश को देखना पड़े तो फिर हिंदी उपन्यास ही क्यों पढ़ा जाए, अंग्रेजी नॉवेल क्यों नहीं ? दिव्य प्रकाश दुबे का उपन्यास “ मुसाफ़िर Cafe ” पढ़ते हुए यही ख्याल आया | अंग्रेजी शब्दावली का प्रयोग पहली बार हुआ हो ऐसा नहीं लेकिन अंग्रेजी शब्दों को देवनागरी की बजाए रोमन में लिखने का चलन हिन्द युग्म प्रकाशन का सुनियोजित क़दम है और संभव है भविष्य में हिंदी उपन्यास और हिंदी Novel अलग-अलग विधाएं हो जाएं लेकिन एक बात है कि जब अंग्रेजी शब्दों को रोमन में लिखना था तो सभी अंग्रेजी शब्दों को ही रोमन में लिखा जाना चाहिए था | कहीं-कहीं यह प्रयोग लेखक और प्रकाशक भूल गए लगते हैं, जैसे चौराहा और हरिद्वार अध्याय में बहुत से अंग्रेजी शब्द हैं – अबोर्ट, प्रेजेंट, रिवाइंड, कनेक्शन, ट्रेनिंग, एडजस्टमेंट आदि | देवनागरी में अंग्रेजी शब्दावली का प्रयोग अन्यत्र भी है | ऐसे में दोहरे मापदंड रखने के पीछे कोई उद्देश्य समझ नहीं आया | भाषा का यह प्रयोग हिंदी को कितना बिगाड़ेगा या हिंदी साहित्य का कितना भला करेगा यह भविष्य पर छोड़ते हुए इस उपन्यास में कई अन्य अच्छे-बुरे पहलुओं पर नजर दौड़ाई जा सकती है |  

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