BE PROUD TO BE AN INDIAN

मंगलवार, जुलाई 10, 2018

जीवन के कण-कण में कविता देखता संग्रह

लघुकविता-संग्रह – खिड़की खोल कर तो देखो 
कवि - डॉ. रूप देवगुण 
प्रकाशन – अक्षरधाम प्रकाशन 
पृष्ठ – 80 
कीमत – 150 /- ( सजिल्द )
‘ खिड़की खोल कर तो देखो ’ 118 लघुकविताओं का गुलदस्ता है जो गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी, बादलों के आने की बात करते हैं, नदी का करिश्मा देखना हो, ओढ़ कर एक लम्बी खामोशी, गली नदी बन गई है, खिड़की खोल कर तो देखो, रोटियाँ खा गईं हमारे बचपन को, पुल पर जगमगाती रौशनी, रात इतनी बुरी तो नहीं, सपनें सपनों को भोगते हैं और झंकृत हो गए मन के तार नामक ग्यारह भागों में विभक्त है |

सोमवार, जुलाई 02, 2018

लघु आकार में बड़ी बातें करती कविताएँ


लघुकविता संग्रह – रास्ता तय करते-करते
कवि – डॉ. रूप देवगुण
प्रकाशन – राज पब्लिशिंग हॉउस
पृष्ठ – 88
कीमत – 125 / - ( सजिल्द )
रास्ता तय करते-करते डॉ. रूप देवगुण जी की 123 लघुकविताओं का संग्रह हैं, जिनको उन्होंने सात भागों में विभाजित किया है | ये सात भाग हैं – चलो चलें पहाड़ पर, नाराज भी हो जाता है समुद्र, यह फाग है कि रंगों का मौसम, आज मैं बहुत उदास हूँ, सारे आकाश को अपने भीतर, अच्छा हूँ न मैं और अपना भी हो जाता है अजनबी | इन शीर्षकों से ही अंदाज लगाया जा सकता है कि कवि का मुख्य स्वर प्रकृति का चित्रण है | इस संग्रह में प्रकृति का वर्णन अधिकांशत: आलम्बन रूप में ही हुआ है, इसके अतिरिक्त कवि आत्म चिन्तन भी करता दिखता है | प्रकृति के माध्यम से वह जीवन दर्शन की बात भी करता है |

रविवार, जून 10, 2018

बदलाव और बिखराव की कहानी कहता उपन्यास

उपन्यास - रेहन पर रग्घू 
लेखक - काशीनाथ सिंह 
प्रकाशक - राजकमल पेपरबैक्स 
पृष्ठ - 164 
कीमत - 215/-
तीन खंडों के 29 अध्यायों में फैली रग्घू की कहानी दरअसल बदलाव और बिखराव की कहानी है | उपन्यास के अंतिम पृष्ठ पर अखिलेश जी का वक्तव्य " यह उपन्यास वस्तुत: गाँव, शहर, अमेरिका तक के भूगोल में फैला हुआ अकेले और निहत्थे पड़ते जा रहे समकालीन मनुष्य का बेजोड़ आख्यान है ", इस उपन्यास की सटीक व्याख्या है | 

बुधवार, मई 23, 2018

समाज में दिव्यांगों की दशा और दिशा का चित्रण करता लघुकथा-संग्रह

लघुकथा-संग्रह – दिव्यांग जगत की 101 लघुकथाएँ 
लेखक – राजकुमार निजात 
प्रकाशक – एस.एन.पब्लिकेशन 
पृष्ठ – 136 
कीमत – 400 /- ( सजिल्द )
अनेकता जहां भारतीय समाज की विशेषता है वहीं भेदभाव का होना इसके माथे पर कलंक जैसा है | भारतीय समाज में जाति, आर्थिकता के आधार पर ऊँच-नीच तो है ही, शारीरिक व मानसिक सक्षमता के आधार पर भी वर्ग हैं | निशक्तजन दिव्यांग कहलाते हैं | कई बार समाज दिव्यांगों के प्रति सामान्यजन जैसा व्यवहार नहीं करता | कहीं इनके प्रति घृणा है, तो कहीं सहानुभूति जबकि बहुधा दिव्यांग इन दोनों को नहीं चाहता | वो चाहता है कि उसे सामान्य पुरुष-स्त्री जैसा सम्मान दिया जाए | राजकुमार निजात जी ने समाज के दिव्यांगों के प्रति नजरिए का बड़ी बारीकी से विश्लेषण करते हुए ‘ दिव्यांग जगत की 101 लघुकथाएँ ’ नामक लघुकथा-संग्रह का सृजन किया है | इस संग्रह में समाज में दिव्यांगों की स्थिति का वर्णन तो है ही, दिव्यांगों के नजरिए से समाज को भी देखा गया है | दिव्यांगों की मनोस्थिति को भी समझा गया है | कुछ दिव्यांग अपनी दिव्यांगता के कारण हीनभावना के शिकार हो जाते हैं, जबकि कुछ अपने हौसले से दिव्यांगता पर विजय पा लेते हैं | लेखक ने इन सभी स्थितियों को लघुकथाओं की कथावस्तु में पिरोया है |

रविवार, अप्रैल 08, 2018

प्रेम के साथ-साथ यथार्थ की बात करता संग्रह

कविता-संग्रह - बस तुम्हारे लिए 
कवयित्री - मीनाक्षी सिंह 
प्रकाशक - अंजुमन प्रकाशन 
पृष्ठ - 120 
कीमत - 120 /- ( पेपरबैक )
मेरी चाहतों का आसमां, यथार्थ धरातल, सुकून-ए-दर्द, रीते-रीते से पल और सकारात्मक बढ़ते कदम नामक पाँच शीर्षकों में विभक्त 68 कविताओं का गुलदस्ता है मीनाक्षी सिंह का कविता-संग्रह ' बस तुम्हारे लिए ' | इन 68 रचनाओं में 67 कविताएँ और 26 हाइकु हैं | कवयित्री ने प्रेम, दर्द, यथार्थ आदि अलग-अलग फ्लेवर की कविताओं को अलग-अलग शीर्षक के अंतर्गत रखा है | 

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...