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बुधवार, जनवरी 10, 2018

कहानियों में नारी पात्रों के महत्त्व को दिखाती पुस्तक

पुस्तक - रूप देवगुण के कहानियों में नारी के विभिन्न रूप 
लेखक - ज्ञानप्रकाश ' पीयूष '
प्रकाशन - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल 
पृष्ठ - 180 
कीमत - 450 /- ( सजिल्द )
प्रो. रूप देवगुण की समस्त कहानियों का अध्ययन करते हुए उनमें प्रमुख नारी पात्रों पर आधारित कहानियों का विश्लेषण करती पुस्तक है ' रूप देवगुण की कहानियों में नारी के विभिन्न रूप ' | इस संकलन में रूप देवगुण की 13 कहानियां हैं और सभी कहानियों के पूर्व ज्ञानप्रकाश ' पीयूष ' जी ने समीक्षात्मक आलेख दिया है | अंत में उपसंहार भी है |

                      पीयूष जी ने रूप देवगुण जी की जिन कहानियों को चुना है उनमें नारी के विभिन्न रूप हैं | दादी, माँ, पत्नी, बहिन, साली, प्रेमिका, शिष्या, मित्र जैसे रूपों को प्रतिनिधित्व दिया गया है तो कर्त्तव्यों के बोझ से दबी महिला, अनमेल विवाह से पीड़ित महिला, कामकाजी महिला को भी दिखाया है | पीयूष जी ने दोहों के द्वारा इस समीक्षात्मक सामग्री को रोचक बनाया है | 
                       इस पुस्तक को मुख्यत: दो भागों में बांटा जा सकता है | एक भाग तो रूप देवगुण जी कहानियों का है तो दूसरा भाग इन पर पीयूष जी की समीक्षा का है | रूप देवगुण की सभी कहानियां बेहद सधी हुई हैं और इन कहानियों के चयन के लिए पीयूष जी बधाई के पात्र हैं क्योंकि प्रत्येक कहानी नारी के अलग चरित्र को उद्घाटित करती है | ' गोद ' कहानी यहाँ दादी के प्यार को दिखाती है, वहीं यह भी दिखाती है कि बुजुर्गों को भी प्यार की बेहद जरूरत होती है | कहानी ' अनचाहे ' महानगरीय जीवन की व्यस्तताओं में पिसते नारी जीवन को दिखाती है | ' पोखर देखे सागर को ' मुंह बोले भाई-भीं के बीच कड़ी ऊँच-नीच की दीवार को दिखाती है | ' वेदना का चक्रव्यूह ' अनाम रिश्ते और स्त्री पात्र यामिनी के अन्तर्द्वन्द्व को दिखाती है | ' कितने प्रश्न ' नटखट साली के चरित्र को उद्घाटित करती है | ' एक धब्बा चाँद पर ' बम्बई नगर की कहानी है और वेश्यालय इस चाँद जैसे नगर पर धब्बा है | ' प्रेरणा ' कहानी में एक अध्यापक से प्रेरित होकर उसकी छात्रा लेखिका बन जाती है | ' बस ठीक है ' अधूरे प्रेम की कहानी है | ' बात समूचे देश की ' कहानी में अन्तर्राज्यीय विवाह को विषय बनाया गया है | ' फरमाइशें ' दाम्पत्य जीवन की कहानी है | ' अवलम्ब ' मुक्ति, बंधन और दिशा के प्रेम त्रिकोण की कहानी है | ' पहचान रिश्ते की ' इस संकलन की अंतिम कहानी है, जिसमें पुरुष-स्त्री की दोस्ती को दिखाया गया है | 
                         पीयूष जी ने इन कहानियों से पूर्व इनका विश्लेषण किया है | स्थान-स्थान पर दोहे दिए हैं | एक उदाहरण देखिए - 
बहिन, भार्या रूप दिव्य, ज्यों मन्दिर में धूप 
सुगन्धमय घर को करे, नारी भव्य अनूप | ( पृ. - 46 )
जीजा-साली के बारे में वे लिखते हैं - 
ससुराल भी सरस लगे, जाना चाहें रोज 
साली तेरे कारने, जीजाजी की मौज | ( पृ. - 71 )
                         कहानियों के शिल्प पक्ष पर भी पीयूष जी ने टिप्पणियाँ की हैं | ' एक धब्बा चाँद पर ' कहानी के बारे में वे लिखते हैं - 
" ' एक धब्बा चाँद पर ' कहानी के प्रारंभ में भारत की मायानगरी मुंबई के प्रमुख दर्शनीय स्थलों का अवलोकन एवं विवेचन कहानी के नायक विवेक द्वारा उनके मौसेरे भाई अम्बुज के सपत्नीक मुंबई भ्रमण हेतु पधारने पर कराया गया है, जो बड़ा रोचक और ज्ञानवर्धक बन पड़ा है | इसमें वर्णात्मक एवं विवेचानात्मक दोनों शैलियों का स्वाभाविक प्रयोग यथा अवसर हुआ है |"( पृ. - 84 )
उपसंहार में वे लिखते हैं - 
" इन कहानियों का उद्देश्य नारी के विभिन्न रूपों को प्रकट करना ही माना जा सकता है | सभी नारी पात्रों ने अपने-अपने रूप एवं भूमिकाओं का निर्वहन उत्कृष्ट तरीके से किया है | कहानियों की भाषा पात्रानुकूल एवं भावानुकूल है, सरल, सहज, सुबोध एवं प्रवाहमयी है |( पृ. - 178 )
                          संक्षेप में, इस पुस्तक में रूप देवगुण की कहानियों में नारी पात्रों के महत्त्व को दिखाया गया है | यह पुस्तक कहानी के पाठकों और शोधार्थियों दोनों के लिए उपयोगी साबित होगी |
दिलबागसिंह विर्क 
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1 टिप्पणी:

Kavita Rawat ने कहा…


ज्ञानप्रकाश ' पीयूष ' जी पुस्तक " रूप देवगुण के कहानियों में नारी के विभिन्न रूप" के बारे में उत्सुकता जगाती जानकारी प्रस्तुति हेतु धन्यवाद, पीयूष जी को बधाई

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