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सोमवार, दिसंबर 25, 2017

अच्छा जीवन जीने की सीख देता संग्रह

बाल कविता-संग्रह - बाल मन की किलकारी 
कवि - डॉ. मेजर शक्तिराज 
प्रकाशन - अमृत बुक्स, कैथल 
पृष्ठ - 88 
कीमत - 200 /- ( सजिल्द )
 बच्चों के पसंदीदा विषयों को लेकर उन्हें सिखाने, अच्छा इंसान बनाने का प्रयास करता संग्रह है ' बाल मन की किलकारी ' | इस संग्रह में आठ-आठ पंक्तियों की 75 कविताएँ हैं |

                      कवि माँ सरस्वती को याद करते हुए संग्रह की शुरूआत करता है | इसके बाद रिश्तों पर बाल कविताएँ हैं, जिनमे माँ, दादी, ताई का जिक्र है | फूलों की फुलवारी जैसी माँ कभी नहीं थकती, वह अच्छी बातें सिखलाती है, लाड लड़ाती है | बच्चों से बच्चा हो जाना भी माँ की विशेषता है | दादी के बारे में वह लिखते हैं - 
दादी तो है एक कविता 
कल-कल झरना, बहती सरिता ( पृ.- 18 ) 
ताई के घर जाकर छुट्टियों का मजा आ जाता है | कवि अपने घर, स्कूल पर भी कविता लिखता है | वह बच्चों को पुस्तकें पढ़ने और खेल खेलने की सलाह देता है | साफ़-सफाई का महत्त्व बताता है | चाँद, तारे, सूरज भी कविताओं के विषय हैं | चाँद जहाँ मामा है, वहीं सूरज दादा है  | तारों के बारे में कवि लगता है - 
लुकछिप-लुकछिप करें सितारे 
शायद हैं वे सखा हमारे ( पृ.- 25 )
कवि तारों के मिल-जुलकर रहने की बात बताता है | गुड़िया, तितली, फ्राक, गाय, टॉमी, मिट्ठू तोता, चिड़िया रानी, मछली, टोपी, चूहे, मच्छर, भेड़, मोर आदि पर भी कविताएँ हैं | तितली नाजुक ही नहीं, अपितु कराते जानती है | फ्राक के ऊपर जिराफ है | टॉमी फुर्तीला है, घर की रखवाली करता है | कवि गाय का महत्त्व बताता है | मिट्ठू मिर्ची नहीं लड्डू-पेड़े खाता है | चिड़िया चीं-चीं के गीत सुनती है | चूहों से बचने के लिए बिल्ली की जरूरत है | मच्छर डेंगू, मलेरिया लाता है | भेड़ से ऊन मिलती है | वर्ष में मोर नाचता है |
                        कवि घर में पढाई के अलग-अलग माहौल को 'अ,आ,ई ' कविता में यूँ व्यक्त करता है - 
दादी कहती अ आ ई 
मम्मी कहती ए बी सी  ( पृ.- 30 )
कवि कविता के माध्यम से मत्री भाषा का महत्त्व भी बताता है | योगासन, तैराकी, जूडो-कराटे, ओलम्पिक को लेकर भी कविताएँ हैं | बच्चों में पहलवान बनने की तमन्ना है | मुर्गा देर तक सोने वालों को जल्दी जागने का महत्त्व बताता है | ' लाल बत्ती ' कविता सड़क पर चलने के नियम सिखाती है | कविताओं में संगीत, हँसी का महत्त्व है, होली का जिक्र है, अच्छी आदतों का वर्णन है | 
                   कवि सलाद, संतुलित भोजन का महत्त्व बताते हुए सेहत का राज बताता है | शाकाहार पर बल देता है | वह दाल रोटी की बात करता है-
मिस्सी रोटी और धी 
तन व मन को रखे सही ( पृ.- 85 )
जन्म दिन पर पौधे लगाने की परम्परा पर बल है | सर्दी, गर्मी, बरखा, वसंत की ऋतुओं का वर्णन है | गर्मी के फलों ककड़ी, खरबूजा, तरबूज का वर्णन है | आम के गुणों का बखान है | बच्चों को अच्छा इंसान बनने, कम और मीठा बोलने का उपदेश है | अहिंसा अपनाने की बात है | पौधों के संसार का वर्णन है | नीम के पेड़ और जल का महत्त्व बताया गुआ है | मित्र का महत्त्व दिखाया है | तीज-त्यौहार, दीवाली पर कविताएँ हैं | ईचकदाना, छपक छैयां जैसे पारम्परिक विषयों पर भी कविताएँ हैं |
                     इन कविताओं की विशेषता सरल भाषा और गेयता है | आसान शब्दावली के चलते वे सहज ही बच्चों की जुबान पर चढ़ जाएँगी और बच्चे इन्हें गुनगुनाते हुए जाने-अनजाने रिश्तों की समझ, अच्छी जीवन-शैली को सीख जाएंगे, इसकी पूरी उम्मीद है | कवि इस संग्रह के लिए बधाई का पात्र है | 
दिलबागसिंह विर्क 
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2 टिप्‍पणियां:

sweta sinha ने कहा…

बहुत सुंदर समीक्षा,कविताएँ अति सयाहनीय है।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर समीक्षा।

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