भ्रष्टाचार भारत का पर्याय बनता जा रहा है . वर्तमान में
2 जी घोटाला सुर्ख़ियों में है . राष्ट्र्मंडल खेलों की बात अभी बहुत पुरानी नहीं हुई है . आखिर ऐसा क्यों होता है ?समय-समय पर नए-नए घोटाले उभर कर सामने आते हैं .देश का पूरा मीडिया कुछ दिन तक नए उभरे घोटाले के पीछे उलझा रहता है , फिर कुछ दिन के बाद हालात ऐसे हो जाते हैं , जैसे कुछ हुआ ही नहीं . इस देश में हर्षद मेहता का क्या हुआ ? चारा घोटाले, बोफोर्स घोटाले का क्या हुआ ?कुछ भी नहीं . यही वो कारण है जिसके कारण बार-बार घोटाले होते हैं .देश का प्रत्येक आदमी अपने सामर्थ्य के अनुसार घोटाले करने में जुटा हुआ है . न्याय प्रक्रिया का अत्यंत धीमा होना आग में घी डालता है .नैतिकता का अभाव, देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को न समझना कुछ अन्य कारण हैं .
इसका तत्कालीन समाधान तो विशेष अदालतों का गठन ही दिखता है . दोषियों को यथाशीघ्र और सख्त-से-सख्त सज़ा घोटालों की संख्या को कम कर सकती है ,लेकिन इस उपाय को अपनाने में पता नहीं कितना समय लगेगा ? जब तक घोटाले रोकने का कोई उपाय नहीं अपनाया जाता तब तक देश की सम्पत्ति यूं ही धूर्तों के हाथ लगती रहेगी और आम जनता दुखी व त्रस्त रहेगी . दुर्भाग्य से यही भारत का भाग्य बनता जा रहा है .
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2 जी घोटाला सुर्ख़ियों में है . राष्ट्र्मंडल खेलों की बात अभी बहुत पुरानी नहीं हुई है . आखिर ऐसा क्यों होता है ?समय-समय पर नए-नए घोटाले उभर कर सामने आते हैं .देश का पूरा मीडिया कुछ दिन तक नए उभरे घोटाले के पीछे उलझा रहता है , फिर कुछ दिन के बाद हालात ऐसे हो जाते हैं , जैसे कुछ हुआ ही नहीं . इस देश में हर्षद मेहता का क्या हुआ ? चारा घोटाले, बोफोर्स घोटाले का क्या हुआ ?कुछ भी नहीं . यही वो कारण है जिसके कारण बार-बार घोटाले होते हैं .देश का प्रत्येक आदमी अपने सामर्थ्य के अनुसार घोटाले करने में जुटा हुआ है . न्याय प्रक्रिया का अत्यंत धीमा होना आग में घी डालता है .नैतिकता का अभाव, देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को न समझना कुछ अन्य कारण हैं .
इसका तत्कालीन समाधान तो विशेष अदालतों का गठन ही दिखता है . दोषियों को यथाशीघ्र और सख्त-से-सख्त सज़ा घोटालों की संख्या को कम कर सकती है ,लेकिन इस उपाय को अपनाने में पता नहीं कितना समय लगेगा ? जब तक घोटाले रोकने का कोई उपाय नहीं अपनाया जाता तब तक देश की सम्पत्ति यूं ही धूर्तों के हाथ लगती रहेगी और आम जनता दुखी व त्रस्त रहेगी . दुर्भाग्य से यही भारत का भाग्य बनता जा रहा है .
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