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मंगलवार, दिसंबर 20, 2016

सामाजिक सोच में परिवर्तन की तड़फ है काव्य-संग्रह

समीक्षक – डॉ. अनिल सवेरा 
829, राजा गली, जगाधरी 
हरियाणा – 135003
मो. – 94163-67020
प्राप्ति स्थान - 1. Redgrab 
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महाभारत जारी है ’ कवि दिलबागसिंह विर्क रचित नवीनतम काव्य-संग्रह है, जिसे उन्होंने सामर्थ्यवान लोगों की बेशर्म चुप्पी को समर्पित किया है | कवि के भीतर भी एक महाभारत मची है | उसी का परिणाम है यह काव्य-संग्रह | कवि समाज की सोच में परिवर्तन चाहता है | ऐसा परिवर्तन, जिससे समाज में सुधार हो | ‘ चश्मा उतार कर देखो ’, ‘ अपाहिज ’, और ‘ मेरे गाँव का पीपल ’ इसी विषय पर आधारित रचनाएं हैं | 

                      कवि विर्क समाज में बढ़ते लालच, गरीबी, भूखमरी, नैतिक व शैक्षिक मूल्यों में आई गिरावट, रिश्तों के खोखलेपन आदि कुरीतियों से आहत है | गरीबी का चित्रण करती ‘ जिंदादिली ’ कविता की ये पंक्तियाँ देखें – 
बाज़ीगिरी / कोई चुनता नहीं शौक से / यह तो मुकद्दर है /
गरीबी के माथे मढ़े लोगों का / और इस मुकद्दर को /
कला बनाकर जीना / जिंदादिली है |
              संग्रह में प्रमुख से “ बेटियों ” से संबंधित भावों पर रचनाकर्म भी है | ‘ बिटिया ’, ‘ कन्यादान ’, व ‘ एक मासूम-सा सवाल ’ बेटियों पर आधारित कविताएँ ही हैं | कवि के मन में अनेक प्रश्न हैं | बेटियों से भेदभाव पर कवि के मन में प्रश्न हैं | ‘ कन्यादान ’ कविता की ये पंक्तियाँ देखें – 
आखिर कब तक / चलेगा यह भेदभाव ? / कब तक /
वस्तु बनी रहेगी कन्या / कब तक / बराबरी का हक़ /
नहीं मिलेगा उसे / कब तक होता रहेगा / 
कन्या का दान / वस्तु की तरह ? हमे सोचना होगा |
               दो खंडों में विभक्त इस कृति के दूसरे खंड में “ महाभारत ” के पात्रों का द्वंद्व अंकित किया गया है | दूसरे खंड में आठ कविताओं में भीष्म के अहंकार पर चिन्तन करती लम्बी कविता है – ‘ आत्ममंथन ’ | ‘ गुरुदक्षिणा ’ में एकलव्य के समर्पण पर चिन्तन है | शेष रचनाओं में भी अनेक अनुत्तरित प्रश्नों पर कवि ने चिन्तन प्रस्तुत किया है | 
               मुक्त छंद में रचित यह कृति सामाजिक विसंगतियों पर कटु प्रहार कर चिन्तन को विवश करती है | शब्द चयन काव्यानुरूप है | कवि के कुछ शब्द प्रयोग उल्लेखनीय हैं, यथा – हौए का वामन होना, शब्दों का आग उगलना, बन्दूकों का लिखना आदि | संग्रह पठनीय है | सोच को परिवर्तित करने की ललक व तड़फ के लिए कवि विर्क को साधुवाद |

कविता-संग्रह – महाभारत जारी है 
कवि – दिलबागसिंह विर्क 
प्रकाशक – अंजुमन प्रकाशक, इलाहाबाद 
मूल्य  – 120 / - 
पृष्ठ – 112 

2 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बधाई और शुभकामनाएं।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-12-2016) को गांवों की बात कौन करेगा" (चर्चा अंक-2566) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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