श्री दिलबाग विर्क को मैं अंतरजाल के माध्यम से जानती हूँ | अंतरजाल पर उनके अपने ब्लॉग्स हैं | इसके अलावा वे कई अन्य साझा ब्लॉग्स पर सक्रियता से योगदान देते हैं | मैं उनकी रचनाएँ अंतरजाल पर पढ़ती रहती हूँ जो मुझे बेहद पसंद आती हैं | लगभग हर विधा जैसे छंद , ग़जल , कविता , समीक्षा , लघुकथा , हाइकु , ताँका इत्यादि में उन्हें महारथ हासिल हैं|
मंगलवार, मार्च 27, 2012
हाइकु संग्रह की ऋता शेखर मधु जी द्वारा लिखित समीक्षात्मक भूमिका
शुक्रवार, मार्च 09, 2012
शिक्षा का हाल बताते दो किस्से
RTE के अंतर्गत पहली से लेकर आठवीं तक के किसी भी विद्यार्थी को फेल नहीं करना , उसका नाम नहीं काटना । पत्र-पत्रिकाओं में यह सूचना इतने जोर-शोर से बताई गई कि बच्चा- बच्चा इससे परिचित है । इसके अतिरिक्त अध्यापक को बच्चों को डांटने तक का अधिकार नहीं है , यह बात भी आज के बच्चे जानते हैं । इन सब बातों के परिणाम भविष्य में हम सबके सामने होंगे, लेकिन फिलहाल जो माहौल बन रहा है उसकी बानगी इन दो बातों से हो सकती है। ये दोनों बातें मेरे दोस्तों के साथ घटी और शत-प्रतिशत सही हैं ।
शुक्रवार, मार्च 02, 2012
चुप बैठी सरकार
मानें ना कानून को , स्वयंभू हुए आप ।
लेकर सत्ता हाथ में , करे फैसले खाप ||
करे फैसले खाप , रहे तोड़-फोड़ जारी |
हो कोई भी बात , ट्रैक रोंकें नर-नारी ||
लोग हैं परेशान, न दु:ख किसी का जानें |
पशुतुल्य हुए भीड़, कब किसी की ये मानें ||
* * * * *
अदालत लगाती रही , बार-बार फटकार |
बनकर भोली-बावली , चुप बैठी सरकार ||
चुप बैठी सरकार , करे पक्षपात भारी |
चहेते बने गेस्ट , मार पात्रों को मारी ||
करें हैं हेर-फेर , बनाई कैसी आदत |
ना करना अन्याय , देख रही है अदालत ||
* * * * *
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